अव्यवस्था / पांच किमी लंबी लाइन में धूप में 5 घंटे खड़े रहे 4000 लोग, सिर्फ 1500 को ही मिला अनाज

  • शनिवार से पॉजिटिव केस वाले क्षेत्रों में सिर्फ मनपा खिलाएगी खाना
  • डिंडोली में अनाज के लिए लगी भीड़ में सोशल डिस्टेंसिंग गायब दिखी
  • बच्चे भूखे हों तो कैसे हो सोशल डिस्टेंसिंग
  • 37 डिग्री तापमान में कई लोग बेहोश होकर गिरे तो नींबू-पानी पिलाया
  • जिन क्षेत्रों में कोरोना पॉजिटिव वहां आज से खाना नहीं खिला सकेंगे एनजीओ : मनपा आयुक्त
  • मिलन प्वॉइंट पर लगी 3 किमी लंबी कतार

सूरत. लॉकडाउन में सरकार की ओर से लोगों को भुखमरी से बचाने के लिए अनाज पहुंचाने की व्यवस्था तो की जा रही है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। शुक्रवार को अन्न ब्रह्म योजना के तहत कतारगाम, उधना, पांडेसरा, गोडादरा समेत शहर में 36 केंद्रों पर बिना राशनकार्ड वाले गरीबों को मुफ्त में अनाज बांटा गया। 37 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान में भी लोग अनाज लेने के लिए लंबी लाइन में खड़े रहे।


4000 लोग लाइन पर, राशन मिला केवल 1500 को
पांडेसरा के बमरोली में स्थित देवकीनंदन स्कूल में किट लेने के लिए लोगों की लंबी लाइन लगी रही। यहां गुरुवार रात से लोग लाइन में लगना शुरू हुए और दोपहर तक तीन से पांच किलोमीटर लंबी लाइन लग गई। यहां मिलन प्वॉइंट से तेरे नाम चार रास्ता तक लोगों की कतार दिख रहगी थी। लगभग 4000 लोग लाइन में थे, लेकिन राशन की किट 1500 ही थी। बाकी बचे लोगों को दूसरे दिन आने को कह दिया गया। लोग थैले-बोरी सिर पर रखकर धूप से बचने की कोशिश कर रहे थे। अनाज वितरण के दौरान पुलिस, आरएफ और एसआरपी के जवान तैनात थे लेकिन भूख से बेहाल लोगों की भीड़ ऐसी थी कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करा सके।


शनिवार से पॉजिटिव केस वाले क्षेत्रों में सिर्फ मनपा खिलाएगी खाना
मनपा कमिश्नर बंछानिधि पाणी ने शुक्रवार को कहा कि जिन क्षेत्रों में कोरोना पाॅजिटिव मामले आ रहे हैं। वहां शनिवार से एनजीओ लोगों को खाना नहीं खिला पाएंगे। जिन क्षेत्रों में पॉजिटिव केस आए है। उन घरों के 100 मीटर की परिधि में एनजीओ भोजन की व्यवस्था नहीं कर सकेंगे, केवल राशन की किट दे सकेंगे। भोजन की व्यवस्था पालिका करेगी। यह निर्णय कोरोना के लोकल ट्रांसमिशन को ध्यान में रखकर लिया है। हालांकि, एनजीओ की भोजन वितरण व्यवस्था जारी रहेगी। ये व्यवस्था बंद नहीं की जा रही है। सभी एनजीओ से आग्रह है कि सोशल डिस्टेंस बनाए रखें। सोशल डिस्टेंसिंग नहीं रखने से संक्रमण बढ़ रहा है।


पुलिस, आरएफएफ के जवान खड़े होकर देखते रहे
जिनके पास गुजरात का आधार कार्ड नहीं था, उन्हें अनाज नहीं दिया गया। सेंटर पर मौजूद कर्मचारियों ने लोगों की परेशानी नहीं सुनी और उन्हें खाली हाथ लौटा दिया। सेंटरों पर समुचित व्यवस्था किए बिना ही अनाज बांटना शुरू कर दिया। इस दौरान सोशल डिस्टेंस का पालन भी नहीं कराया जा रहा था। जल्दी किट देकर रवाना करने का भी प्रयास नहीं किया। पुलिस, आरएफएफ के जवान खड़े होकर देखते रहे।


कभी सोचा नहीं था कि खाने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ेगा
पांडेसरा में तेरे नाम चार रास्ता, गोवालक नगर, देवकीनंदन स्कूल, मिलन प्वॉइंट पर अनाज किट दिए जा रहे थे। लाइन में खड़े कई लोग कड़ी धूप में बेहोश होकर गिर गए थे। उन्हें नींबू पानी देकर होश में लाने के बाद अनाज देकर घर भेजा गया। लोगों ने कहा कि कभी सोचा नहीं था कि खाने के लिए इस तरह लाइन में खड़ा होना पड़ेगा। कई जगह लाइन में खड़े लोग आपस में ही झगड़ा करने लगे थे। अनाज लेने के लिए लोगों में होड़ लगी थी। देवकीनंदन स्कूल में 3 से 5 किलोमीटर तक लोगों की लंबी लाइन ही दिखाई दे रही थी। प्रशासन को इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि लोगों की इतनी भीड़ जमा हो जाएगी।


गरीबों को भूख से मारने का इंतजाम कर रही सरकार
घंटों तक लाइन में खड़े होने के बाद अनाज की किट मिलते ही लोग नाराज हो गए। किट में 3 किलो चावल, एक किलो चने की दाल, एक किलो शक्कर और नमक था। लोगों ने कहा कि इतने कम राशन में परिवार का गुजारा कैसे होगा। सरकार हमारे साथ मजाक कर रही है और हमें भूख से मारने का इंतजाम कर रही है। बेहाल लोगों ने कहा कि इस अनाज से एक दिन भी परिवार का पेट नहीं भरेगा।


कोरोना से तो नहीं लेकिन भूख से मर जाएंगे
रोजी-रोटी कमाने के लिए उत्तर प्रदेश से सूरत आया हूं। मुझे नहीं पता कि कोरोना क्या है। पूरा परिवार मेरे ऊपर निर्भर है। गांव में बहुत गरीबी देखी, लेकिन कभी भूखा नहीं सोया। एक महीने से एक-एक दिन पहाड़ की तरह बीत रहा है। रोज कमाकर खाने वाले परिवार के पास राशन कार्ड कहां से होगा। बिना राशन कार्ड वाला अनाज लेने के लिए 6 घंटे से लाइन में खड़ा हूं। -इद्रीश अंसारी, फूलवाड़ी


बच्चे भूखे हैं, उनके लिए लाइन में खड़ी हूं
लॉकडाउन में नौकरी-धंधा सब बंद है। इस महीने पगार भी नहीं मिली। अगले महीने में क्या होगा पता नहीं। घर में बैठने से काम कैसे चलेगा। बड़े तो समझ जाते हैं, लेकिन बच्चे भूख लगने पर रोते हैं। सुबह 7 बजे से लाइन में खड़ी हूं, दोपहर 3 बजे गेट तक पहुंच पाई हूं। -सोनूबेन, गृहिणी, मरीमाता रोड


मनपा अधिकारियों ने 2000 लोगों को खाना खिलाने से रोका
मनपा अधिकारियों ने शुक्रवार को सोशल डिस्टेंसिंग का हवाला देकर पांडेसरा के झोपड़पट्टी क्षेत्र में कुछ समाजसेवियों द्वारा खाना खिलाने पर रोक लगा दी है। गुलाब सिंह और भोलेनाथ की तरफ से रोज लगभग 2000 लोगों को खाना खिलाया जाता था। अधिकारियों ने कहा कि शनिवार से यहां खाना मत खिलाओ।

रात 2 बजे लाइन में लगे, सुबह 11 बजे तक नंबर नहीं आया
हजारों लोग गुरुवार देर रात 2 बजे से वितरण केंद्र पर लाइन में लग गए थे। कुछ तो यहीं सो गए थे तो कुछ ने बोरी, चप्पल को लाइन में लगा दिया। सुबह 11 बजे तक नंबर नहीं आया। लाइन में लगे लोगों ने कहा कि ऐसे हालात में एक किलो चावल भी बहुत है। कहीं से मदद मिलने की कोई उम्मीद अब नहीं है। लॉकडाउन कब खत्म होगा हमें काम कब मिलेगा, इसका जवाब काेई नहीं दे रहा है।


सरकार या तो गांव जाने दे या फिर खाना दे
परिवार की हालत बहुत खराब है। सबकुछ बंद होने से दिहाड़ी करने वाले पति को कोई कामकाज नहीं मिल रहा है। माेहल्लेवाले फूड पैकेट देते थे, अब बंद कर दिया है। अब तो खाने के लिए लाइन लगानी पड़ रही है। सरकार या तो गांव जाने दे या दो वक्त का खाना दे। -शाहीनबेन, गृहिणी, साबरीनगर