न्यूज़डीई की ग्राउंड रिपोर्ट / बेघर हुए... बेरोजगार हुए, अब बेबसी का सफर, सीमा पर खुले आसमान के नीचे काटनी पड़ रही रात

बड़वानी. लॉकडाउन के डेढ़ माह बाद भी मजदूरों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। रोजगार छिन चुका है। जमा-पूंजी खत्म हो चुकी है। सिर पर गृहस्थी का सामान और गोद में छोटे-छोटे बच्चों को लेकर लाखों लोग तपती धूप में लगातार पैदल चल रहे हैं। मीलों तक कोई भोजन-पानी के लिए पूछने वाला नहीं। जो वाहनों से आ रहे हैं, उन्हें मुंहमांगी कीमत चुकानी पड़ रही है।

मजबूरी... एक ट्रक में 30 से ज्यादा लोग बैठकर आ रहे
बड़वानी जिले का बिजासन घाट दो हफ्तों से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कारण हजारों मजदूर प्रतिदिन मुंबई, नासिक, कल्याण, से अपने घर उप्र व बिहार इसी रास्ते से जा रहे हैं। उनका कहना है, कोरोना से बाद में मरेंगे, घर नहीं पहुंचे तो ऐसे ही मर जाएंगे। महाराष्ट्र सरकार की बस इन्हें बिजासन घाट के पहले ही छोड़ देती है, मप्र में आते हैं तो बस या कोई अन्य साधन नहीं मिलता। मजबूरन ट्रक या लोडिंग वाहनों में प्रति मजदूर 3 से 4 हजार रु. किराया चुकाकर घर जाना पड़ रहा है। गोरखपुर निवासी सुरेश शर्मा ने बताया, एक ट्रक में 30 से ज्यादा लोग बैठ रहे हैं। ट्रक वाले एक मजदूर से 3-4 हजार रु. वसूल रहे हैं। बाइक से घर जा रहे आजमगढ़ के धर्मेंद्र बैंस ने कहा, मोबाइल पर रास्ता सर्च किया तो विरार वेस्ट के पास 20 किमी जंगल में चले गए। फिर वापस आकर लोगों से सही रास्ता पूछा।

विदिशा : रोज 20-25 हजार लोग महाराष्ट्र से जा रहे यूपी विदिशा शहर से सबसे ज्यादा 20000 से 25000 लोग रोजाना महाराष्ट्र से यूपी के लिए जा रहे हैं। इनमें करीब 3000 लोग पैदल और साइकिल से सैकड़ों मील का सफर तय करने वाले गरीब मजदूर हैं।

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शिवपुरी : यूपी पुलिस रातभर रोके रखती है वाहन
सिकंदरा चौकी के पास उप्र पुलिस द्वारा महाराष्ट्र-गुजरात से लौटने वाले मजदूरों को स्क्रीनिंग के नाम पर रातभर रोका जाता है। शाम पांच बजे के बाद उप्र की सीमा में स्क्रीनिंग बंद हो जाती है। रविवार शाम से रोके गए मजदूरों को सोमवार सुबह दस बजे रवाना किया गया। मुंबई में कपड़ा मिल में काम करने वाले रवींद्र केवट ने बताया कि मिल संचालक ने भगा दिया। अपने घर गोरखपुर पहुंचने के लिए पूरी जमापूंजी खर्च कर 35 हजार रुपए किराए पर लोडिंग वाहन लिया है।

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