लॉकडाउन का दर्द / इंदौर में पलायन कर लौट रहे मजदूरों को सिटी बस से फ्री में घर पहुंचाया जा रहा; बाॅर्डर पर बसों में चढ़ने के लिए हंगामा हो रहा

  • बिजासन घाट पर सुबह बस आने पर बैठने के लिए रॉन्ग साइड जाकर दौड़े मजदूर, महिलाओं और बच्चों को परेशानी हुई
  • इंदौर बाइपास पर मुंबई, नासिक, पुणे और गुजरात की ओर से पलायन कर रहे मजदूरों के लिए जिला प्रशासन ने 6 सिटी बसों 
  • की व्यवस्था की
बड़वानी/इंदौर/देवास. लॉकडाउन में फंसे श्रमिकों का पलायन जारी है। महाराष्ट्र समेत अन्य प्रदेशों से लौटने वाले मजूदरों के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने बस सुविधा शुरू की है। नई व्यवस्था लागू होने के दूसरे दिन बुधवार को सेंधवा के बिजासन घाट (महाराष्ट्र-मप्र बॉर्डर) पर अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। यहां मजदूरों को काफी परेशान होना पड़ा। घंटों इंतजार करने के बाद बस आने पर मजदूर बैठने के लिए टूट पड़े। सोशल डिस्टेंसिंग गायब दिखी। वहीं, मंगलवार रात में आए मजदूरों को बिजासन मंदिर परिसर में खुले आसमान के नीचे सोना पड़ा। इन्हें बिस्तर तक नसीब नहीं हुआ। दूसरी ओर, इंदौर प्रशासन ने जिले के मजदूरों के लिए एक नया मॉडल डेवलप किया है। इंदौर बाइपास पर मुंबई, नासिक, पुणे और गुजरात की ओर से पलायन करके आने वाले मजदूरों के लिए 6 सिटी बसों की व्यवस्था की है। एआईसीटीएसएल के सीईओ संदीप सोनी ने बताया कि पैदल चल रहे मजदूरों को राऊ बाइपास से मांगलिया तक छोड़ा जा रहा है। बाहर से आने वाले मजदूरों से बिना कोई शुल्क लिए उन्हें जिले के भीतर उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा रहा है।
बड़वानी: राॅन्ग साइड जाकर बसों को देख दौड़ी भीड़
बुधवार सुबह 7 बजे से सेंधवा के बिजासन मंदिर परिसर में 3 से 4 हजार मजदूरों की भीड़ जमा थी। एसडीएम घनश्याम धनगर ने मजदूरों को सोशल डिस्टेंस बनाकर कतार में खड़े रहने के लिए कहा। 8 बजे बसों के आने पर मजदूर राॅन्ग साइड जाकर बसों पर टूट पड़े। इससे महिलाओं और बच्चों को मुसीबत हुई। उन्हें बसों में बैठने के लिए जगह नहीं मिली। 3 हजार से अधिक मजदूरों को बिना स्वास्थ्य परीक्षण के रवाना कर दिया गया। इसके बाद मजदूरों को भंवरगढ़ पर लगे कैंप के पास स्कूलों की बसों से पहुंचाया गया। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के मजदूरों को अलग-अलग बिठाकर भेजा गया।
100 से अधिक बसों से मजदूर रवाना हुए
शाम तक 100 से अधिक बसों से मजदूरों को उनके जिले में और अन्य प्रदेशों के मजदूरों को देवास तक छोड़ा गया। बुधवार को वरला, बलवाड़ी, धवली रूट की बसों को भी लगाया गया। बसों में सोशल डिस्टेंस का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। उन्हें जैसे-तैसे बिठाकर रवाना किया गया। महाराष्ट्र से आए मजदूरों की सूची तक नहीं बनाई गई। शाम तक व्यवस्थाएं संभालने के लिए कलेक्टर अमित तोमर, जिला पंचायत सीईओ मनोज सरियाम, एएसपी सुनीता रावत, एसडीएम घनश्याम धनगर आदि मौजूद रहे।

मजदूरों ने कहा - घंटों इंतजार किया, फिर मिली बस, व्यवस्थित नहीं बिठाया
महाराष्ट्र के ठाणे में काम करने वाले सुनील कुमार ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के जौनपुर जा रहे हैं। उन्हें महाराष्ट्र से बस में व्यवस्थित बिठाकर भेजा गया। एक सीट पर एक व्यक्ति को बिठाया गया। यहां पर घंटों इंतजार करने के बाद बसों में ठूस-ठूस कर बिठा दिया। पन्ना के रहने वाले अजय सेन ने बताया- महाराष्ट्र में स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ आधार कार्ड नंबर, नाम, पता और मोबाइल नंबर भी लिखा गया। यहां कुछ नहीं हो रहा है। दतिया के सतीश कुमार ने बताया- मंगलवार शाम 5 बजे से रुकवाया है, लेकिन अब तक बस नहीं आई। दोनों टाइम खाने में सिर्फ खिचड़ी दी जा रही है।

भीड़ में गर्भवती महिला को हुई दिक्कत

महाराष्ट्र के ठाणे से आईं चंद्रकला भारती इस समय 5 माह से गर्भवती हैं। वे पति पति रामचंद के साथ अपने घर उत्तर प्रदेश के मऊ जिले जा रही थीं। उन्हें बस से बिजासन तक छोड़ा गया था। सुबह बसों में भीड़ होने से उन्हें दिक्कत हुई। बस में चढ़ नहीं पाए। बिठाने की व्यवस्था नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताई।

मां और भाई बस में बैठे, बेटी रह गई नीचे
शिवपुरी जिले के दामरोल गांव कि वंदना (17) पिता पर्वत सिंह उसकी मां किरण और बड़े भाई के साथ मुंबई में रहती थी। मां और भाई मजदूरी करते थे। सुबह महाराष्ट्र की बस से उन्हें भंवरगढ़ कैंप तक छोड़ा गया था। देवास जाने वाली बस में सुबह 9 बजे भीड़ टूट पड़ी। जिसमे वंदना की मां किरण और भाई गोलू तो चढ़ गए। लेकिन, बेटी वंदना नीचे रह गई। उसने आवाज भी दी, लेकिन तब तक बस रवाना हो गई। दोपहर 2 बजे वंदना को दूसरी बस में देवास के लिए भेजा गया। वंदना की मां और वंदना के पास मोबाइल भी नहीं था। ऐसे में दोनों का संपर्क भी नहीं हो सका।


खुले आसमान में तपती धूप से बचने के लिए चादर का सहारा
हाईवे से बड़ी संख्या में मजदूर लोडिंग वाहनों में बैठकर जा रहे हैं। कुछ मजदूर तो कंटेनर के बॉक्स में बैठने के बाद उसकी छत पर बैठकर भी सफर कर रहे हैं। धूप से बचने के लिए सिर पर चादर ढंककर जा रहे हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश का एक परिवार टैंपो में बैठकर सूरत से फतेहपुर जा रहे थे। टैंपो की छत नहीं होने पर उन्हें धूप से बचने के लिए चद्दर बांधी थी। जैसे तैसे मजबूरी में मजदूर अपने घर पहुंचने के प्रयास कर रहे हैं।

देवास से ऐसे भेजा जा रहा है बसों से

महाराष्ट्र सीमा पर प्रशासन द्वारा मजदूरों को भेजने के लिए कैंप लगाया गया है। मजदूरों को रोकने के लिए दो टेंट लगाकर उन्हें रुकवाया गया है। पेयजल की व्यवस्था के लिए 2 पानी के टैंकर खड़े किए गए हैं। मजदूरों को छोड़ने के लिए महाराष्ट्र सीमा से सेंधवा से देवास, देवास से गुना, देवास से सागर, गुना से भिंड, गुना- दिनारा, मुरैना, ग्वालियर, दतिया, झांसी के लिए बस व्यवस्था की गई है। वहीं, देवास से दौलतपुर (सीहोर), दौलतपुर-सागर- मालथौन व दौलतपुर- सागर- छतरपुर (महोबा यूपी) के लिए बसों की व्यवस्था की गई है।

देवास से पांच हजार श्रमिकाें काे भेजा

देवास में आर्गस गार्डन में श्रमिक केंद्र बनाया गया है। यहां से सेंधवा बाॅर्डर से बस में सवार होकर आने वाले मध्य प्रदेश समेत अन्य प्रदेशाें के श्रमिकाें काे उनके जिले के लिए रवाना किया जा रहा है। यहां पर सभी को भोजन उपलब्ध करवाने के साथ ही मेडिकल परीक्षण के बाद सागर और गुना सेंटर रवाना किया जा रहा है। यहां से वे अपने घरों के लिए रवाना होंगे। मंगलवार रात को यहां से 150 बसों को रवाना किया गया। वहीं, बुधवार शाम तक 80 बसें मजदूरों को लेकर गुना, सागर गईं। अब तक यहां से पांच हजार मजदूर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो चुके हैं।