सोनिया अध्यक्ष बनीं, राहुल का नियंत्रण पार्टी पर बना रहा

बागी नेताओं के एक सूत्र ने 'इंडिया टुडे' से कहा कि पार्टी के 25 सांसद पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले थे।  कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जारी पत्र पर पूरे देश के लगभग 100 नेता डायरीखत करने वाले थे लेकिन आधे से ज्यादा इसमें पीछे हट गए क्योंकि उन्हें कार्रवाई का डर था। 

अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस में हलचल जारी है।  पार्टी नेता दिग्विजय सिंह के एक बयान में शामिल है और तेजी ला दी है।  दिग्विजय सिंह ने कहा है कि पार्टी के अंदर उपद्रव एक दिन में नहीं फैला है।  यह विवाद उसी दिन तेज हो गया था जिस दिन सोनिया गांधी पिछले साल पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनी थीं।  राहुल गांधी ने राष्ट्रपति का पद छोड़ दिया लेकिन पार्टी पर उनका नियंत्रण बना रहा।  इसका सबूत पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति से मिलता है।

 ऐसा लगता है कि पार्टी के नेताओं में अनुकरणोश का एक कारण यही बना है कि राहुल गांधी भले ही राष्ट्रपति नहीं रहे लेकिन पर्दे के पीछे वे पार्टी पर नियंत्रण जारी रखे हुए थे।  पार्टी में बागी नेताओं की संख्या राज्यसभा चुनाव के बाद और बढ़ी।  मुकुल बनानी या केसी वेणुगोपाल की जगह राजीव सातव के नामांकन के लिए राहुल गांधी ने हामी भरी।  इस फैसले के बाद पार्टी में विरोध बढ़ गया।
 बागी नेताओं के एक सूत्र ने 'इंडिया टुडे' से कहा कि पार्टी के 25 सांसद पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले थे।  कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जारी पत्र पर पूरे देश के लगभग 100 नेता डायरीखत करने वाले थे लेकिन आधे से ज्यादा इसमें पीछे हट गए क्योंकि उन्हें कार्रवाई का डर था।  एक नेता ने बताया, लोकसभा और राज्यसभा से 12-12 नेता पत्र के समर्थन में थे।  इन नेताओं ने कहा कि वे जो कर रहे हैं वह सही है लेकिन वे पीछे इसलिए हट गए क्योंकि उनके खिलाफ कार्रवाई का डर था।  उन्हें डर था कि पार्टी से निकाल दिया जाएगा।

अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस में हलचल जारी है।  पार्टी नेता दिग्विजय सिंह के एक बयान में शामिल है और तेजी ला दी है।  दिग्विजय सिंह ने कहा है कि पार्टी के अंदर उपद्रव एक दिन में नहीं फैला है।  यह विवाद उसी दिन तेज हो गया था जिस दिन सोनिया गांधी पिछले साल पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनी थीं।  राहुल गांधी ने राष्ट्रपति का पद छोड़ दिया लेकिन पार्टी पर उनका नियंत्रण बना रहा।  इसका सबूत पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति से मिलता है।
  ऐसा लगता है कि पार्टी के नेताओं में अनुकरणोश का एक कारण यही बना है कि राहुल गांधी भले ही राष्ट्रपति नहीं रहे लेकिन पर्दे के पीछे वे पार्टी पर नियंत्रण जारी रखे हुए थे।  पार्टी में बागी नेताओं की संख्या राज्यसभा चुनाव के बाद और बढ़ी।  मुकुल बनानी या केसी वेणुगोपाल की जगह राजीव सातव के नामांकन के लिए राहुल गांधी ने हामी भरी।  इस फैसले के बाद पार्टी में विरोध बढ़ गया।

  बागी नेताओं के एक सूत्र ने 'इंडिया टुडे' से कहा कि पार्टी के 25 सांसद पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले थे।  कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जारी पत्र पर पूरे देश के लगभग 100 नेता दीखत करने वाले थे लेकिन आधे से ज्यादा इसमें पीछे हट गए क्योंकि उन्हें कार्रवाई का डर था।  एक नेता ने बताया, लोकसभा और राज्यसभा से 12-12 नेता पत्र के समर्थन में थे।  इन नेताओं ने कहा कि वे जो कर रहे हैं वह सही है लेकिन वे पीछे इसलिए हट गए क्योंकि उनके खिलाफ कार्रवाई का डर था।  उन्हें डर था कि पार्टी से निकाल दिया जाएगा।

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