छत्तीसगढ़ में भूमकाल दिवस:नक्सलियों ने टेटम और चिकपाल कैंप पर रानी बोदली जैसे हमले की दी धमकी; सरेंडर करने वाले नक्सलियों को बताया गद्दार


 छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने एक बार फिर मुरकीनार और रानी बोदली जैसे हमले की धमकी दी है। इस बार चिकपाल और टेटम कैंप को निशाना बनाने की बात कही है। साथ ही पर्चे फेंककर सरेंडर करने वाले नक्सलियों को गद्दार बताया है। नक्सलियों ने भूमकाल दिवस पर ग्रामीणों से 111वीं वर्षगांठ मनाने की अपील की है। बताया गया है कि यह पर्चे नक्सलियों की कटेकल्याण एरिया कमेटी की ओर से जारी किए गए हैं। नक्सलियों के फेंके पर्चे बुधवार सुबह लोगों ने देखे तो पुलिस को सूचना मिली। नक्सलियों ने इसमें माना है कि प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे लोन वर्राटू अभियान के तहत 100 से ज्यादा सरेंडर कर चुके हैं। उनको गद्दार बताते हुए सजा देने की भी बात कही है। वहीं नक्सलियों ने लिखा है, समाधान योजना और ऑपरेशन प्रहार को हराएंगे। लोगों से अपील की है कि मोदी का नया भारत नहीं, बल्कि नवजनवादी भारत बनाने के लिए संघर्ष करें। देश में सबसे बड़ा हमला था रानी बोदली के कैंप पर हमला नक्सलियों ने साल 2007 में बीजापुर से करीब 12 किमी दूर कुटरू क्षेत्र में स्थित रानी बोदली बेस कैंप पर हमला किया था। 600 से ज्यादा हथियारबंद नक्सलियों ने गुरिल्ला वार करते हुए देर रात फायरिंग और ग्रेनेड से हमला कर दिया था। इसमें 16 आर्म्ड फोर्स और 39 स्पेशल पुलिस अफसर सहित 55 जवान शहीद हो गए थे। नक्सली इसके बाद हथियार भी लूट ले गए। यह देश में अब तक का सबसे बड़ा नक्सली हमला था। अंग्रेजों के खिलाफ शुरू किया था आदिवासियों ने भूमकाल अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आदिवासियों ने भूमकाल आंदोलन की शुरुआत की थी। इसका अर्थ है, जमीन से जुड़े लोगों का आंदोलन। इस आंदोलन में बस्तर के हजारों आदिवासियों ने अपने जल, जंगल और जमीन के लिए युद्ध लड़ा था। लड़ाई के दौरान कई आदिवासियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। हर साल 10 फरवरी को भूमकाल दिवस मनाया जाता है। भूमकाल के नायक शहीद गुंडाधुर को माना जाता है। नक्सली खुद मान रहें हैं कि 100 से अधिक नक्सलियों ने समर्पण किया है। लोन वर्राटू जारी रहेगा समर्पण करने वालों का स्वागत है। नक्सलियों की टेटम और चिकपाल कैंप पर हमला करने की साजिश ख्वाब ही रह जाएगी।