कांग्रेस के पार्षद प्रेमचंद मिश्रा ने उठाया सवाल, कहा- मुख्यमंत्री को इतना समय कैसे मिल जाएगा कि वे खेल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति का भार उठाएंगे

 


बिहार विधान परिषद में बिहार खेल विश्वविद्यालय विधेयक-2021 भी पारित किया गया। यह विधेयक जब पास हो रहा था तो बिहार में खेल पर भी बात हुई। विपक्ष की ओर से कांग्रेस के पार्षद प्रेमचंद मिश्रा ने बिहार में खेल की बदतर स्थिति पर विस्तार से बातें कहीं। उन्होंने कहा कि राजधानी पटना स्थित मोइनुल हक स्टेडियम से लेकर जिलों में बने हुए सभी खेल स्टेडियमों की स्थिति बदतर है और इसकी परवाह 15-16 साल से नीतीश सरकार नहीं कर रही।

मिश्रा ने कहा कि बिहार में खेल मंत्रालय भी है और उसके लिए बजट भी है, फिर भी खेल की स्थिति में बिहार एक कदम आगे नहीं बढ़ा। नीतीश कुमार खुद इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हो गए। मोइनुल हक स्टेडियम में 93 के बाद कोई अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल नहीं हुआ। राज्य के खिलाड़ियों को कोई ट्रेनिंग नहीं है, खिलाड़ियों के अंदर सेक्योरिटी का भरोसा नहीं है। कोई कोचिंग की व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने कहा कि बिहार में स्पोर्ट्स को कैरियर बनाने से बिहार के युवा डरते हैं। यह भी सवाल उठाया कि एक मुख्यमंत्री के पास इतना समय है कि वे कुलाधिपति के रुप में इसे संभाल पाएंगे? पार्षद प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि खेल के कई मैदान पुलिस लाइन में बदल कर रह गए हैं। खेल के लिए कोचिंग की व्यवस्था करनी होगी और खिलाड़ियों के लिए नौकरी की व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने खेल पर बोलते हुए कई बार 'खेला होबे' शब्द का भी इस्तेमाल किया।